As-salamu alaykum रमज़ान का महीना हर मुसलमान के लिए बहुत खास होता है, लेकिन इस महीने में एक रात ऐसी होती है जो हज़ार महीनों से बेहतर है – वो है Laylat al Qadr Hindi , यानी क़द्र की रात। कुरान में अल्लाह तआला ने इसे एक बेहद मुबारक रात बताया है, जिसमें दुआएं कबूल होती हैं, गुनाह माफ होते हैं, और नेकियों का सवाब हज़ार गुना बढ़ जाता है।
Laylat al Qadr hindi आमतौर पर रमज़ान के आखिरी 10 दिनों की रातों में आती है – जैसे 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं, या 29वीं रात। सबसे ज़्यादा मशहूर 27वीं रात है। लेकिन सवाल ये है कि इस रात को हम कैसे इबादत करें? नमाज़ कैसे पढ़ें? कौन सी दुआएं मांगें? आज इस ब्लॉग में हम आपको लैलतुल क़द्र की अहमियत और इस रात में इबादत का पूरा तरीका बताएंगे, ताकि आप इस मौके का पूरा फायदा उठा सकें। तो चलिए शुरू करते हैं!

Laylat al Qadr Hindi क्या है?
Table of Contents
शब-ए-कद्र का मतलब है “तकदीर की रात” या “क़द्र की रात”। ये वो रात है जिसमें कुरान पहली बार नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर नाज़िल हुआ था। सूरह अल-क़द्र (97:1-5) में अल्लाह फरमाता है:
“हमने इसे (कुरान को) क़द्र की रात में उतारा। और तुम्हें क्या मालूम कि क़द्र की रात क्या है? क़द्र की रात हज़ार महीनों से बेहतर है। उस रात फरिश्ते और रूह (जिब्रील) अपने रब के हुक्म से हर काम के लिए उतरते हैं। वो रात सलामती की होती है, सुबह होने तक।”
इस आयत से पता चलता है कि ये रात बहुत खास है। हदीस में नबी साहब ने फरमाया, “जो शख्स लैलतुल क़द्र में ईमान और सवाब की उम्मीद के साथ इबादत करे, उसके पिछले सारे गुनाह माफ कर दिए जाएंगे।” (सही बुखारी, हदीस 1901)। यानी ये रात हमारे लिए एक सुनहरा मौका है अपनी तकदीर बदलने का, अल्लाह से माफी मांगने का, और जन्नत के करीब जाने का।
लेकिन ये रात कब है, ये कोई पक्का नहीं बता सकता। नबी साहब ने कहा, “इसे रमज़ान के आखिरी 10 दिनों की ताक़ रातों में तलाश करो।” (सही बुखारी, हदीस 2017)। इसलिए हमें हर रात को खास मानकर इबादत करनी चाहिए।
Laylat al Qadr Hindi
इस रात का पूरा फायदा उठाने के लिए पहले से तैयारी ज़रूरी है। ये कुछ तरीके हैं:
- नीयत साफ करें: अपने दिल में ये ठान लें कि आप अल्लाह की रजा और सवाब के लिए इबादत करेंगे। नीयत इबादत की रूह होती है।
- रमज़ान के आखिरी 10 दिन का प्लान बनाएं: 20वीं रात से ही इबादत शुरू करें। हर रात को थोड़ा वक्त निकालें – नमाज़, दुआ, और तिलावत के लिए।
- गुनाहों से तौबा करें: लैलतुल क़द्र से पहले अपने गुनाहों की माफी मांगें। अल्लाह से कहें, “ऐ अल्लाह, मैं अपने सारे गुनाहों की माफी मांगता हूँ, मुझे माफ कर दे।”
- शरीर और कपड़े साफ रखें: गुस्ल करें, साफ कपड़े पहनें, और खुशबू लगाएं। इससे इबादत में ताज़गी आएगी।
- दिन में आराम करें: आखिरी 10 दिनों में दिन में थोड़ा सो लें, ताकि रात को जाग सकें। नबी साहब भी इन दिनों में इबादत के लिए खास तौर पर जागते थे।
Laylat al Qadr Hindi में इबादत का तरीका
अब आते हैं मुख्य सवाल पर – लैलतुल क़द्र में नमाज़ और इबादत कैसे करें? ये रहा पूरा तरीका:
1. इशा और तरावीह की नमाज़
- रात की शुरुआत इशा की नमाज़ से करें। इसके बाद तरावीह पढ़ें, जो रमज़ान की खास नमाज़ है।
- अगर आप मस्जिद में हैं, तो जमाअत के साथ पढ़ें। अगर घर पर हैं, तो अकेले या परिवार के साथ पढ़ सकते हैं।
- तरावीह में कुरान की तिलावत पर ध्यान दें। ये लैलतुल क़द्र की रूह से जुड़ा है, क्योंकि ये कुरान की रात है।
2. तहज्जुद की नमाज़
- लैलतुल क़द्र में सबसे अहम इबादत है तहज्जुद। ये रात की नफ्ल नमाज़ है, जो आधी रात के बाद पढ़ी जाती है।
- कितनी रकअत?: कम से कम 2 रकअत और ज़्यादा से ज़्यादा 8 या 12 रकअत पढ़ सकते हैं। नबी साहब 8 रकअत पढ़ते थे।
- कैसे पढ़ें?:
- 2-2 रकअत करके पढ़ें। हर 2 रकअत के बाद सलाम फेरें।
- हर रकअत में सूरह फातिहा के बाद कोई छोटी सूरह पढ़ें, जैसे सूरह इखलास, सूरह कौसर, या सूरह नास।
- रुकू, सजदा, और तशहुद में पूरा वक्त लें। सजदे में खूब दुआएं मांगें।
- खास दुआ: तहज्जुद में सजदे में ये दुआ पढ़ें – “सुब्हान रब्बियल आला” (मेरा रब सबसे ऊंचा है) और फिर अपनी ज़बान में दुआ मांगें।
3. कुरान की तिलावत
- लैलतुल क़द्र कुरान की रात है, तो इसकी तिलावत ज़रूर करें।
- सूरह अल-क़द्र (97) को बार-बार पढ़ें। इसके अलावा सूरह यासीन, सूरह रहमान, या कोई भी हिस्सा पढ़ सकते हैं।
- अगर पूरा कुरान ख़त्म कर सकते हैं, तो बहुत अच्छा है। नहीं तो जितना हो सके, पढ़ें और मतलब समझें।
4. दुआएं मांगना
- लैलतुल क़द्र दुआओं की कबूलियत की रात है। नबी साहब ने हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा को एक खास दुआ सिखाई थी:
“अल्लाहुम्मा- इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफ्वा फअफु अन्नी”
(ऐ अल्लाह! तू माफ करने वाला है, माफी को पसंद करता है, तो मुझे माफ कर दे।) – (तिर्मिज़ी, हदीस 3513)
- इसके अलावा अपनी ज़बान में भी दुआ मांगें। मिसाल के तौर पर:
- “ऐ अल्लाह, मुझे और मेरे परिवार को माफ कर दे। हमें जन्नत नसीब कर। मेरी मुश्किलें आसान कर दे।”
- दुनिया और आखिरत की भलाई मांगें। अपने मां-बाप, दोस्तों, और सारी उम्मत के लिए दुआ करें।
5. ज़िक्र और इस्तिगफार
- “सुब्हानल्लाह”, “अल्हम्दुलिल्लाह”, “अल्लाहु अकबर” और “अस्तगफिरुल्लाह” का ज़िक्र करें।
- 100 बार इस्तिगफार पढ़ें – “अस्तगफिरुल्लाह रब्बी मिन कुल्लि ज़ंबिन व अतूबु इलैहि” (मैं अपने रब से हर गुनाह की माफी मांगता हूँ और उसकी तरफ रुजू करता हूँ)।
- ये छोटी इबादतें हैं, लेकिन इनका सवाब बहुत बड़ा है।
6. सुबह तक जागना
- अगर मुमकिन हो, तो पूरी रात जागें। नबी साहब रमज़ान के आखिरी 10 दिनों में इबादत के लिए खास तौर पर जागते थे।
- अगर नींद आए, तो थोड़ा आराम करें, लेकिन फज्र से पहले उठ जाएं।
7. फज्र की नमाज़ जमाअत के साथ
- रात की इबादत को फज्र की नमाज़ के साथ खत्म करें। इसे मस्जिद में जमाअत के साथ पढ़ें। ये आपकी रात की इबादत को मुकम्मल करेगी।
Laylat al Qadr Hindi में क्या न करें?
- गुनाहों से बचें: इस रात में गलत बातें, टीवी, या सोशल मीडिया से दूर रहें।
- वक्त ज़ाया न करें: दोस्तों के साथ गप्पें मारने या बेकार कामों में वक्त न गंवाएं।
- झगड़ा न करें: अपने घरवालों या किसी से बहस न करें। ये रात सलामती की है।
खास बाते
- तारीख चेक करें: 2025 में रमज़ान की शुरुआत मार्च 29-30 के आसपास हो सकती है (चांद पर निर्भर)। तो आखिरी 10 दिन अप्रैल 18-28 के बीच होंगे। 27वीं रात शायद 25 अप्रैल के आसपास पड़े।
- फोन पर अलार्म सेट करें: हर ताक़ रात को तहज्जुद के लिए अलार्म लगाएं।
- परिवार को साथ लें: अपने बच्चों और घरवालों को भी इस इबादत में शामिल करें। उन्हें सूरह अल-क़द्र सिखाएं।
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