Eid Milad ul Nabi क्या है?
Eid Milad ul Nabi मुसलमानों का एक अहम त्यौहार है, जिसे पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद ﷺ के जन्मदिन की याद में मनाया जाता है। इस दिन को मौलिद-उन-नबी या बारहवां शरीफ भी कहा जाता है। पैग़म्बर मोहम्मद ﷺ का जन्म इस्लामी कैलेंडर के रबी-उल-अव्वल महीने की 12 तारीख़ को हुआ था।
इस दिन का इतिहास
हज़रत मोहम्मद ﷺ का जन्म मक्का (सऊदी अरब) में हुआ। उन्होंने पूरी दुनिया को अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाया और इंसानियत, मोहब्बत और अमन का पैग़ाम दिया।
ईद मिलाद-उल-नबी पहली बार इस्लामिक इतिहास में फ़ातिमी शासकों के दौर में मनाई गई और आज पूरी दुनिया के मुसलमान इस दिन को यादगार बनाते हैं।

Eid Milad-ul-Nabi का महत्व
- इस दिन मुसलमान पैग़म्बर ﷺ के जीवन, उनकी शिक्षाओं और कुरान के संदेश को याद करते हैं।
- मस्जिदों और घरों को सजाया जाता है।
- जुलूस निकाले जाते हैं और नात-ए-पैग़म्बर ﷺ पढ़ी जाती है।
- गरीबों और ज़रूरतमंदों की मदद की जाती है।
- लोग एक-दूसरे से मोहब्बत और भाईचारे का पैग़ाम साझा करते हैं।
Eid Milad ul Nabi कैसे मनाई जाती है?
- मस्जिदों की सजावट – मस्जिदों में रोशनी और रंगीन झंडे लगाए जाते हैं।
- जुलूस और रैली – लोग नात पढ़ते हुए पैग़म्बर ﷺ की याद में रैली निकालते हैं।
- मिलाद की महफ़िल – कुरान की तिलावत और नातख़ानी की महफ़िल आयोजित की जाती है।
- खैरात – गरीबों को खाना और कपड़े दिए जाते हैं।
- दुआएं – मुल्क और पूरी दुनिया में अमन-ओ-चैन की दुआ की जाती है।
Eid Milad ul Nabi से हमें क्या सीख मिलती है?
- इंसानियत और मोहब्बत से रहना।
- सच बोलना और झूठ से बचना।
- अमन और भाईचारे का पैग़ाम फैलाना।
- गरीब और मजलूम की मदद करना।
- अल्लाह की इबादत में लगे रहना।
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